
" मेरे वज़ूद से बेखबर है वो ऐसे "
मैं धूपघड़ी और वो रात का चाँद है "
दो अनजाने
एक दुनिया दो अंजानो की
दूर तक फैला वो नीला आकाश
और उस अंतहीन नभ से जुड़े हम
बेखबर एक दूसरे से
एक दूसरे के अस्तित्वा से
आकाश में घूमते वो नीले बादल
क्या तुह्मरे यहाँ भी
उतने हसीन दीखते हैं
जीतने चमकते मेरे यहाँ .....
नीले आकाश में तैरते
वो सफ़ेद से बादल
क्या तुम्हे भी समंदर में
तैरते बर्फ का आभास देते हैं
जैसे की मुझे .....
तारों से भरी झिलमिलाती रात
वो अनगिनत चमकते जुगनू
वो सफ़ेद सा पूरा चाँद
क्या तुम्हरी भी अटारी पे
दूधिया रौशनी बिखेरता है
जैसे की मेरे ....
चमकते तारों को एकटक निहारना
दिल में ये अहसास की
कही इसी आकाश के नीचे
तुम भी तो वही तारा
नहीं ढूंढ रहे
जिस तारे की मुझे तलाश है ....
वो मद्धम सी चलती हवा
यू छू कर निकलती है मुझे
क्या मेरी तरह तुम्हे भी
मेरी याद दिला जाती है ?
बारिस की वो हलकी फुहार
जो सराबोर कर देती है मुझे
क्या वो बुँदे तुम्हे भी
मेरी खनकती आवाज़ सुना जाती हैं ....
अकेले बैठे, खुद ही से बातें करते
सन्नाटों और तन्हाई से घिरे
तुम्हारी वो भोली सी मुस्कान
ज्यों मेरे चेहरे पे
बिजली सी कौंध जाती है
क्या मेरी वही खामोश चमकती आँखें
कभी मेरी याद तुम्हे दिला जाती है?
तुम्हारे खामोश सी आँखों के
हर अफ़साने पढ़ लेती मेरी आँखें
क्या तुम्हे भी मेरे अक्स
तुम्हारी आँखों में दिखा जाते हैं
क्या तुम्हे भी एहसास होता है
कभी मेरे वज़ूद , मेरे अस्तित्वा का
इस फैले आकाश के किसी छोर पे
जैसा मुझे हमेशा होता है।
3 comments:
By this poem you can easily express or understand your inner feelings. One of the best poems I have ever come across.
Woh safed sa chand?? Yar Chand safed hi hota hai to?? Neela akaash ???? Yar neela ho hoga na.... sabko malum hai yeh.. Safed badal ... chamakte tare??? Kya bachche ko color combination padha rahe ho kya????
Dear Anonymous
Thanks for taking ur time to read this poem and comparing it wid teaching kid colours...Wats wrong if u see it frm dat point of view... yup m trying...thanks for ur comment buddy...
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